अखिल भारतीय समानता मंच, जातिगत आरक्षण एवं अनु०जा० / ज०जा० (प्रिवेशन आफ ऐट्र्श्वसिटी ऐक्ट 1989 जैसे अन्यायपूर्ण एवं सामाजिक वैमनस्य उत्पन्न करने वाली व्यवस्थाओं को समाप्त करवाने हेतु सधर्षरत है। मंच अपने मूल सिद्धान्त संरक्षण सभी को आरक्षण किसी को नहीं के अनुसार मानता है कि आरक्षण देश तथा इसकी प्रतिभाओं के हितों पर सीधा कुठाराघात है ।

26 जनवरी 1950 को संविधान में समाज के पिछड़े वर्गों के लिए राजनीति, रोजगार तथा शिक्षण संस्थाओं में मात्र दस वर्षों हेतु आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। किन्तु सभी सरकारों द्वारा राजनीतिक स्वार्थों से संविधान में संशोधन कर बिना समीक्षा किए इसे प्रत्येक दशक की समाप्ति पर पिछले सात दशकों से बढ़ाया जाता रहा और 26 जनवरी 2020 से आगामी दस वर्षों हेतु पुन बढ़ा दिया गया है। देश तथा इसकी प्रतिभाओं को आरक्षण से होने वाली असीम क्षति सर्व विदित है। पदोन्नति में आरक्षण हेतु संविधान में संशोधन कर सरकारें इसे कलंकित करती रही हैं। 7 फरवरी 2020 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पदोन्नति में आरक्षण को मौलिक अधिकार न बताते हुए निर्णय दिया कि इसे कर्मचारी की वरिष्ठता तथा जेष्ठता के आधार पर होना चाहिए किन्तु अभी भी इसे निष्प्रभावी करने हेतु प्रयत्न जारी हैं।

20 मार्च 2018 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया था कि अनु०जा० / ज०जा० (प्रिवेशन आफ ऐट्रोसिटी) ऐक्ट 1989 के अन्तर्गत शिकायत किये जाने पर प्राथमिकी दर्ज किये जाने से पूर्व जांच की जानी आवश्यक होनी चाहिए। माननीय न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत की व्यवस्था भी लागू करने सम्बन्धी टिप्पणी की थी । किन्तु केन्द्र सरकार ने संविधान संशोधन कर 1989 के एक्ट को भी शक्तिशाली बना दिया। सरकार ने न केवल प्राथमिकी दर्ज करने से पूर्व जांच की अपितु अग्रिम जमानत की व्यवस्था भी समाप्त कर दी। 14 फरवरी 2020 को माननीय शीर्ष अदालत द्वारा भी उक्त संविधान संशोधन की सही बताया गया है। उक्त ऐक्ट में किसी निर्दोष व्यक्ति को भी मात्र प्राथमिकी दर्ज करवा कर जेल भिजवाया जा सकता है और वास्तव में यह हो भी रहा है। कर्मचारियों के लिए पुरानी पेन्शन योजना लागू करवाना भी नितान्त आवश्यक है।

समाज के सामान्य, पिछड़ा तथा अल्प संख्यक समुदाय एवं सभी कर्मचारियों के हितों की उक्त अन्यायपूर्ण कानूनों से रक्षा करने हेतु सर्व साधारण से अपील की जाती है कि अधिकाधिक संख्या में अखिल भारतीय समानता मंच की सदस्यता लेते हुए इसे यथाशक्ति मजबूत करें। क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर यही एक मात्र ऐसा संगठन है जो कि पूरे मनोयोग एवं समर्पण के साथ इन मामलों को लेकर संघर्ष कर रहा है।